मीराबाई ( mirabai biography in hindi)

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mirabai's hindi project - yash1331

Comments

By: vaibhavrana1614 (14 hours ago)

NICE

By: tp1999 (2 month(s) ago)

how can i down load this ppt

By: harshitkashyap50 (24 month(s) ago)

nice

By: yash1331 (24 month(s) ago)

thx dude !! it will be more cool if authorstream support all stuff of ms office 2010 !!!

 

Presentation Transcript

मीराबाई: 

मीराबाई कृष्णभक्ति शाखा की हिंदी की महान कवयित्री मीराबाई का जन्म संवत् १५७३ में जोधपुर में चोकड़ी नामक गाँव में हुआ था। इनका विवाह उदयपुर के महाराणा कुमार भोजराज जी के साथ हुआ था। ये बचपन से ही कृष्णभक्ति में रुचि लेने लगी थीं।

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जीवन परिचय इनका विवाह उदयपुर के महाराणा कुमार भोजराज जी के साथ हुआ था। ये बचपन से ही कृष्णभक्ति में रुचि लेने लगी थीं विवाह के थोड़े ही दिन के बाद उनके पति का स्वर्गवास हो गया था । पति के परलोकवास के बाद इनकी भक्ति दिन- प्रति- दिन बढ़ती गई। ये मंदिरों में जाकर वहाँ मौजूद कृष्णभक्तों के सामने कृष्णजी की मूर्ति के आगे नाचती रहती थीं ।

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मीराबाई का घर से निकाला जाना मीराबाई का कृष्णभक्ति में नाचना और गाना राज परिवार को अच्छा नहीं लगा । उन्होंने कई बार मीराबाई को विष देकर मारने की कोशिश की । घर वालों के इस प्रकार के व्यवहार से परेशान होकर वह द्वारका और वृंदावन गईं । वह जहाँ जाती थीं, वहाँ लोगों का सम्मान मिलता था। लोग आपको देवियों के जैसा प्यार और सम्मान देते थे। इसी दौरान उन्होंने तुलसीदास को पत्र लिखा था।

तुलसीदास को पत्र: 

तु लसीदास को पत्र स्वस्ति श्री तुलसी कुलभूषण दूषन- हरन गोसाई । बारहिं बार प्रनाम करहूँ अब हरहूँ सोक- समुदाई ।। घर के स्वजन हमारे जेते सबन्ह उपाधि बढ़ाई । साधु- सग अरु भजन करत माहिं देत कलेस महाई ।। मेरे माता- पिता के समहौ, हरिभक्तन्ह सुखदाई । हमको कहा उचित करिबो है, सो लिखिए समझाई।।

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मीराबाई के पत्र का जबाव जाके प्रिय न राम बैदेही । सो नर तजिए कोटि बैरी सम जद्यपि परम सनेहा ।। नाते सबै राम के मनियत सुह्मद सुसंख्य जहाँ लौ । अंजन कहा आँखि जो फूटे, बहुतक कहो कहां लौ।।

मीरा रचित ग्रंथ: 

मीरा रचित ग्रंथ मीराबाई ने चार ग्रंथों की रचना की :- बरसी का मायरा गीत गोविंद टीका राग गोविंद राग सोरठ के पद इसके अलावा मीराबाई के गीतों का संकलन "मीराबाई की पदावली' नामक ग्रन्थ में किया गया है।

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मीराबाई की भक्ति मीरा की भक्ति में माधुर्य-भाव काफी हद तक पाया जाता था। वह अपने इष्टदेव कृष्ण की भावना प्रियतम या पति के रुप में करती थी। उनका मानना था कि इस संसार में कृष्ण के अलावा कोई पुरुष है ही नहीं। कृष्ण के रुप की दीवानी थी

मीराबाई के गुरु और अन्य: 

मीराबाई के गुरु और अन्य मीराबाई रैदास को अपना गुरु मानते हुए कहती हैं - गुरु मिलिया रैदास दीन्ही ज्ञान की गुटकी । इन्होंने अपने बहुत से पदों की रचना राजस्थानी मिश्रित भाषा में की है इसके अलावा कुछ विशुद्ध साहित्यिक ब्रजभाषा में भी लिखा है। इन्होंने जन्मजात कवियित्री न होने के बावजूद भक्ति की भावना में कवियित्री के रुप में प्रसिद्धि प्रदान की । मीरा के विरह गीतों में समकालीन कवियों की अपेक्षा अधिक स्वाभाविकता पाई जाती है । इन्होंने अपने पदों में श्रृंगार और शांत रस का प्रयोग विशेष रुप से किया है।

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Thank You -yash1331 , nikhil , pranav & kruship Roll No.:- 31 60 22 40 9 th – C , Shardayatan School , Piplod , Surat . 395007