MAHATMA GANDHI

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Gandhi Presentation in Hindi

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महात्मा गांधी:

महात्मा गांधी 1869-1948

जन्मस्थल:

जन्मस्थल जन्म दिन - 2 अक्टूबर 1869 जन्म – स्थान - पोरबंदर, गुजरात पिता - करमचंद गांधी माँता - पुतली बाई करमचंद गांधी - पोरबंदर के दीवान

सामाजिक स्थिति:

सामाजिक स्थिति गांधीजी , हिंदू समाज में दूसरी सबसे ऊंची जाति में पैदा हुए थे योद्धा जाति आधुनिक पोरबंदर, भारत

एक युवा के रूप में (15 साल की उम्र)):

एक युवा के रूप में (15 साल की उम्र) ) स्कूल - अल्फ्रेड हाई स्कूल , राजकोट विवाह - 1883 में , 13 साल की उम्र में पत्नी का नाम - कस्तूरबा गांधी

किशोर अवस्था :

किशोर अवस्था 4 सितंबर, 1888 - गांधीजी लंदन रवाना कानून की पढ़ाई करने कॉलेज - यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन एक वकील के रूप में प्रशिक्षित मांस, शराब, और संकीर्णता से संयम की हिंदू उपदेशों (नियम आदि का) पालन

लन्दन मैं समय  1888 - 1891:

लन्दन मैं समय 1888 - 1891 नृत्य सीखा शाकाहारी सोसाइटी - कार्यकारी समिति के लिए निर्वाचित ब्यासवाटर अध्याय की स्थापना श्रीमद् भगवद् गीता , हिन्दू व इसी शास्त्रों का अध्ययन

भारत में एक कैरियर की स्थापना : 1891-1893:

भारत में एक कैरियर की स्थापना : 1891-1893 मुंबई में कानूनी अभ्यास  की स्थापना के प्रयास - विफल विद्यालय में शिक्षक की अंशकालिक नौकरी सुरक्षित करने में नाकाम मामूली रहन - याचिकाओं के मसौदे तैया करना अप्रैल 1893 - दादा अब्दुला एंड को . साउथ अफ्रीका मैं  नौकरी

साउथ अफ्रीका मैं गांधीजी  : 1893- 1914:

साउथ अफ्रीका मैं गांधीजी : 1893- 1914 दक्षिण अफ्रीका में गांधी को भारतीयों पर निर्देशित भेदभाव का सामना करना पड़ा ! प्रथम श्रेणी  से तृतीय श्रेणी मैं जाने के विरोध  पर, गांधीजी को पीटरमैरिट्सबर्ग मैं ट्रेन से बहार फेके गये ! एक यूरोपीय यात्री के लिए जगह हना खली करने पर , ड्राईवर ने पीटा ! जीवन के निर्णायक बिंदु - सामाजिक अन्याय के प्रति जागरण, जिसका प्रभाव उनकी सामजिक सक्रियता पर पड़ा ! बोअर युद्ध के दौरान एम्बुलेंस कोर में सेवारत.

दक्षिण अफ्रीका में परिपक्व:

दक्षिण अफ्रीका में परिपक्व गांधीजी अपनि पत्नी कस्तूरबा  के साथ दक्षिण अफ्रीका मैं  (1902)

दक्षिण अफ्रीका:

दक्षिण अफ्रीका गांधी और उनके कानूनी सहयोगियों . गांधी और उनके दक्षिण अफ्रीकी दोस्तों . गांधीजी ने बोअर युद्ध एवं ज़ुलु युद्ध मैं एम्बुलेंस कोर यूनिट का नेतृत्व किया ! ब्रिटिश सरकार की सहायता करके, भारतियों को  पूर्ण  नागरिकता दिलाने की इच्छा असफल रही सत्याग्रह की शुरुआत - 1908

भारतीय स्वतंत्रता के लिए संघर्ष (1915-1945):

भारतीय स्वतंत्रता के लिए संघर्ष (1915-1945)

भारत लौटना - 1915:

भारत लौटना - 1915 1915 मैं भारत लौटे . उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सम्मेलनों मैं भाषण दिए। भारतीय लोग, भारतीय मुद्दों, राजनीति के सामने पेश किया , गोखले ने, जो INC के जाने - माने नेता थे ।

गाँधी  ने  नेतृत्व की भूमिका ली:

गाँधी  ने  नेतृत्व की भूमिका ली गांधी लोगों के एक समूह का प्रचार अपने अनुयायियों के साथ बातचीत के दौरान ट्रेन में गांधी

प्रथम विश्व युद्ध में भूमिका:

प्रथम विश्व युद्ध में भूमिका अप्रैल 1918 मैं , गांधीजी को वाइसराय ने एक युद्ध सम्मलेन मैं आमंत्रित किया। शायद साम्राज्य के लिए अपने समर्थन को दिखाने के लिए और भारत की आजादी के लिए अपने मामले में मदद करने के लिए, गांधी के लिए सक्रिय रूप से युद्ध प्रयास में भारतीयों की भर्ती करने पर सहमत हुए. इस बार गांधीजी को लड़ाकों को भारती करवाना था।

विश्व युद्ध के बीच  का समय :

विश्व युद्ध के बीच  का समय 1918 मैं बिहार के चंपारण क्षेत्र मैं, किसानो और मजदूरों को जबरदस्ती  नील के उत्पादन के लिए मजबूर किया! गांधीजी ने इसके खिलाफ आवाज़ उठाई और अहिंसा सत्याग्रह का एलान कर दिया! वह अशांति फ़ैलाने के आरोप में पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिए गए ! मगर इसका खूब जम कर विरोध हुआ और आखिरकार ब्रिटिश   सरकार को गांधीजी को छोडना पड़ा। गांधी, 1918 में जब वह खेड़ा सत्याग्रह का नेतृत्व किये

गांधीजी की रणनीति:

गांधीजी की रणनीति गांधीजी ने  अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष में अपने हथियार स्वरूप असहयोग, अहिंसा और शांतिपूर्ण प्रतिरोध को कार्यरत किया। पंजाब के जलियांवाला बाग में ब्रिटिश सैनिकों द्वारा नागरिकों पर  नरसंहार ने राष्ट्र को गहरा आघात  पहुँचाया जिसके कारण जनता का  गुस्सा बेकाबू हो गया  और हिंसा का रूप अपनालिया ! नमक मार्च पर गांधी. दांडी मार्च पर गांधीजी गांधीजी ने ब्रिटिश राज के अत्याचार और भारतीयों की जवाबी हिंसा , दोनों की आलोचना कि। जब उनको  गिरफ्तार किया, उन्होंने भूख हड़ताल के  माध्यम अपना  अहिंसक विरोध जारी रखा.

गांधीजी को "वार्ता" के लिए लन्दन बुलाया जाता है:

गांधीजी को "वार्ता" के लिए लन्दन बुलाया जाता है 10, डाउनिंग स्ट्रीट, लंदन, ब्रिटेन पर प्रधानमंत्री के घर पर

कारावास:

कारावास 10 मार्च  1922 को गांधीजी को राजद्रोह की साजिश करने के लिए गिरफ्तार कर लिया गया और 6 साल की सजा सुने गयी ! दो साल बाद पथरी के ऑपरेशन के लिए उन्हें छोड दिया गया! मगर इन दो सालों मैं गांधीजी के नेतृत्व के बिना इंक दो भागों मैं बात गया था। हिन्दू और मुसलमानों के  बीच मैं जो सहयोग था , वह  भी गांधीजी के बिना टूटने लगा था। गांधीजी ने इन मतभेदों को दूर करने के लिए , तीन हफ्ते का आमरन अनशन किया। गांधीजी " अनशन" पर।

विश्व-युद्ध II - भारत के स्वतंत्रता मैं बाधा :

विश्व-युद्ध II - भारत के स्वतंत्रता मैं बाधा लंबे विचार - विमर्श के बाद, गांधी ने घोषणा की कि भारत एक जाहिरा तौर पर युद्ध जो लोकतान्त्रिक आजादी के लिए लड़ी जा रही है उसमे भाग नहीं ले सकता क्योंकि उसको खुद स्वतंत्रता इनकार है। दुसरे और गांधीजी ने  आजादी की मांग तेज कर दी और भारत छोड़ो प्रस्ताव पर एक  मसौदा तैयार कर दिया ! यह गांधीजी  और कांग्रेस पार्टी का  सबसे निश्चित विद्रोह था   ब्रिटिश को भारत से बाहर करने का। जवाहर लाल नेहरू अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के जनरल सत्र में गांधी के बगल में बैठे, 1942.

गांधीजी और नेहरूजी -  भारत की आजादी के लिये काम करते हुए. :

गांधीजी और नेहरूजी -  भारत की आजादी के लिये काम करते हुए . एक खुश मूड में गांधी - नेहरू गांधीजी और नेहरूजी  भारत की आजादी प्राप्त करने की के लिए  लिए गंभीर विचार  मैं .

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जिन्ना, मुस्लिम गुट के नेता,  के साथ महात्मा गांधी, 1944 में गांधीजी विशाल सभा संबोधितकरते हुए

गांधीजी ने एक साधारण  जीवन बिताया :

गांधीजी ने एक साधारण  जीवन बिताया गांधीजी चरखा चालते  हुए गांधीजी पेपर पड़ते हुए ! साबरमती आश्रम मैं गअन्धिजी का कमरा

बूढ़े होकर भी साथ साथ :

बूढ़े होकर भी साथ साथ

भारत की स्वंतंत्रता:

भारत की स्वंतंत्रता 15 अगस्त, 1947 को जब भारत को आजादी मिली,  तब गांधीजी दिल्ली मई नहीं थे। वे दूर कोल्कता मैं हिन्दू मुसलमानों के बीच का बैर सुलझा रहे थे। हालांकि नेहरू और पूरे संविधान सभा ने उन्हें "'राष्ट्र के पिता": और  भारतीय स्वतंत्रता के वास्तुकार के रूप में , सलाम किया!,.

भारत का विभाजन - भारत और पाकिस्तान:

भारत का विभाजन - भारत और पाकिस्तान विभाजन से हिन्दू और मुसलमानों के बीच बहुत असंतोष था और यह मुसलमानों के खिलाफ हिंसा मैं अनुवाद हो गया ! गांधीजी इस हिंसा की वारदात को बंद करने के लिए , आमरण  अनशन पर बैठ गए ! जब सारे समुदाय के प्रतिनिधियों ने यह दिलासा दिया की आगे अब दंगे और हिंसा नहीं होगी, तब गांधीजी ने अपना अनशन तोडा।

"हे राम" - गांधीजी का अंत :

"हे राम" - गांधीजी का अंत गांधीजी ने अपने लिए अतिरिक्त सुरक्षा मना  कर दी थी ! 30 जनवरी 1948 को जब वे पूजा के लिए जा रहे थे , तब सामने से एक शक्स बापूजी के पाँव पर गिरा और फिर उसने बापू के सीने मैं तीन गोलियां उतर दी। शक्स का नाम नाथूराम घोड्से था  और वह एक हिन्दू ब्राह्मण  था    । बापू " हे राम " कहते हुए अपने प्राण त्याग दिए ! .

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महात्मा गाँधी - हमारे राष्ट्र पिता  ( 1869 - 1948)

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