Ang Daan

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avayav addan in hindi

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अंगदान:

अंगदान बाई अनंत राव

परिचय:

परिचय मरने के बाद हमारे सभी अंगों को खाक में मिल जाना है । कितना अच्छा हो कि मरने के बाद ये अंग किसी को जीवनदान दे सकें । अगर धार्मिक अंधविश्वास आपको ऐसा करने से रोकते हैं तो महान ऋषि दधीचि को याद कीजिए , जिन्होंने समाज की भलाई के लिए अपनी हड्ड़ियां दान कर दी थीं । उन जैसा धर्मज्ञ अगर ऐसा कर चुका है तो आम लोगों को तो डरने की जरूरत ही नहीं है । सामने आइए और खुलकर अंगदान कीजिए , इससे किसी को नई जिंदगी मिल सकती है ।

क्या है अंगदान:

क्या है अंगदान अंगदान एक ऐसी प्रक्रिया है , जिसमें एक इंसान ( मृत और कभी-कभी जीवित भी ) से स्वस्थ अंगों और टिशूज ़ को ले लिया जाता है और फिर इन अंगों को किसी दूसरे जरूरतमंद शख्स में ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है । इस तरह अंगदान से किसी दूसरे शख्स की जिंदगी को बचाया जा सकता है । एक शख्स द्वारा किए गए अंगदान से 50 जरूरतमंद लोगों की मदद हो सकती है ।

किन-किन अंगों का दान:

किन-किन अंगों का दान हमारे देश में लिवर , किडनी और हार्ट के ट्रांसप्लांट होने की सुविधा है । कुछ मामलों में पैनक्रियाज भी ट्रांसप्लांट हो जाते हैं , लेकिन इनके अलावा दूसरे अंगों का भी दान किया जा सकता है : किडनी , हार्ट लिवर पैनक्रियाज इन्टेस्टाइन और लंग्स स्किन बोन और बोन मैरो कॉर्निया

दो तरह के अंगदान:

दो तरह के अंगदान एक होता है अंगदान और दूसरा होता है टिशू का दान । अंगदान के तहत आता है किडनी , लंग्स , लिवर , हार्ट , इंटेस्टाइन , पैनक्रियाज आदि तमाम अंदरूनी अंगों का दान । टिशू दान के तहत मुख्यत : आंखों , हड्डी और स्किन का दान आता है । ज्यादातर अंगदान तब होते हैं , जब इंसान की मौत हो जाती है लेकिन कुछ अंग और टिशू इंसान के जिंदा रहते भी दान किए जा सकते हैं ।

दो तरह के अंगदान:

दो तरह के अंगदान जीवित लोगों द्वारा दान किया जाने वाला सबसे आम अंग है किडनी , क्योंकि दान करने वाला शख्स एक ही किडनी के साथ सामान्य जिंदगी जी सकता है । वैसे भी जो किडनी जीवित शख्स से लेकर ट्रांसप्लांट की जाती है , उसके काम करने की क्षमता उस किडनी से ज्यादा होती है , जो किसी मृत शरीर से लेकर लगाई जाती है । भारत में होने वाले ज्यादातर किडनी ट्रांसप्लांट के केस जिंदा डोनर द्वारा ही होते हैं । लंग्स और लिवर के भी कुछ हिस्सों को जीवित शख्स दान कर सकता है ।

दो तरह के अंगदान:

दो तरह के अंगदान इसके अलावा आंखों समेत बाकी तमाम अंगों को मौत के बाद ही दान किया जाता है । घर पर होने वाली सामान्य मौत के मामले में सिर्फ आंखें दान की जा सकती हैं । बाकी कोई अंग नहीं ले सकते । बाकी कोई भी अंग तब लिया जा सकता है , जब इंसान की ब्रेन डेथ होती है और उसे वेंटिलेटर या लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर ले लिया जाता है ।

आयु सीमा:

आयु सीमा कोई भी शख्स अंगदान कर सकता है । उम्र का इससे कोई लेना-देना नहीं है । नवजात बच्चों से लेकर 90 साल के बुजुर्गों तक के अंगदान कामयाब हुए हैं । अगर कोई शख्स 18 साल से कम उम्र का है तो उसे अंगदान के लिए फॉर्म भरने से पहले अपने मां-बाप की इजाजत लेना जरूरी है ।

अंगों को सहीं समय पर लगाना:

अंगों को सहीं समय पर लगाना इन अंगों को डॉक्टर जल्द-से-जल्द किन्हीं ऐसे मरीजों में ट्रांसप्लांट कर देते हैं , जिन्हें पहले से इनकी जरूरत रही हो । अंग प्रत्यारोपण करने वाले अस्पतालों के पास एक वेटिंग लिस्ट होती है । उसके हिसाब से जिस मरीज का नंबर होता है , उसमें अंग को लगा दिया जाता है । अंग लगाते वक्त मैचिंग के लिए ब्लड ग्रुप और दूसरे कई टेस्ट किए जाते हैं । अगर सब कुछ ठीक है तो अंग लगा दिया जाता है और अगर मैचिंग नहीं होती तो वेटिंग लिस्ट के अगले मरीज के साथ उसे मैच किया जाता है ।

कितने समय तक सही:

कितने समय तक सही लिवर निकालने के 6 घंटे के अंदर ट्रांसप्लांट हो जाना चाहिए । किडनी 12 घंटे के भीतर लग जानी चाहिए । आंखें 3 दिन के भीतर लगा दी जानी चाहिए ।

अंगदान करने के तरीके:

अंगदान करने के तरीके इसके लिए दो तरीके हो सकते हैं । कई एनजीओ और अस्पतालों में अंगदान से संबंधित काम होता है । इनमें से कहीं भी जाकर आप एक फॉर्म भरकर दे सकते हैं कि आप मरने के बाद अपने इस-इस अंग को दान करना चाहते हैं । आप जो-जो अंग चाहेंगे , सिर्फ वही अंग लिया जाएगा । आप सभी या कोई एक अंग दान कर सकते हैं । संस्था से आपको एक डोनर कार्ड मिल जाएगा , लेकिन इस कार्ड की कोई लीगल वैल्यू नहीं होती ।

अंगदान करने के तरीके:

अंगदान करने के तरीके इसके बाद अपने निकटतम संबंधियों को इस बारे में जानकारी दे दें कि मैंने अपने इन-इन अंगों को दान कर दिया है और मेरे मरने के बाद उन्हें इस काम को पूरा करना है । अगर आप फॉर्म नहीं भरते हैं , तो भी कोई खास फर्क नहीं पड़ता । बस अपने निकटतम लोगों को अपनी इच्छा बताकर रखें । मौत हो जाने पर अंगदान की जिम्मेदारी आपके संबंधियों पर होगी क्योंकि उन्हें ही कॉल करनी है । अगर आपने फॉर्म नहीं भी भरा है तो भी अंगदान हो जाएगा । आपके फॉर्म भरने के बाद भी अगर संबंधी न चाहें तो अंगदान मुमकिन नहीं है ।

किसने देखा अगला जन्म:

किसने देखा अगला जन्म आमतौर पर लोग धार्मिक आस्थाओं के कारण अंगदान करने से बचते हैं , लेकिन तमाम धर्म-आध्यात्मिक गुरु भी इस बात को कह चुके हैं कि अंगदान करना एक बड़े पुण्य का काम है क्योंकि इससे आप एक मरते हुए शख्स को जिंदगी दे रहे हैं और किसी को जिंदगी देने से बड़ा पुण्य भला क्या होगा ! आंखें दान करने वाले अगले जन्म में अंधे पैदा होंगे , जैसी बातें अंधविश्वास हैं ।

किसने देखा अगला जन्म:

किसने देखा अगला जन्म खुद सोचिए , अगर किसी ने दिल और गुर्दे दान कर दिए , तो इस थियरी के हिसाब से तो अगले जन्म में उसे बिना दिल और किडनी के पैदा होना चाहिए । क्या ऐसा मुमकिन है कि कोई इंसान बिना दिल और किडनी के जन्म ले ? है ना हास्यास्पद ! धर्म से संबंधित ऐसी सभी मान्यताएं जो अंगदान न करने की बात करती हैं , महज अंधविश्वास हैं , जिन्हें नजरंदाज करके हर किसी को अंगदान के लिए आगे आना चाहिए ।

धन्यवाद…:

धन्यवाद …

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