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MARY KOM HINDI PPT

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एक महिला मुक्केबाज मैरी कॉम :

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मैरी कॉम जन्म 1 मार्च 1983 (आयु 31) कांगाथेय गांव   मणिपुर . निवास भारत माता - पिता मंगते टोनपा कॉम और मंगते अखम कॉम राष्ट्रीयता भारतीय नागरिकता भारतीय व्यवसाय मुक्केबाज   मिडलवेट कद १५८.४९ सेमी जीवनसाथी ओनक्लर कॉम

मैरी कॉम कौन है ?:

मैरी कॉम कौन है ? मैरी कॉम का पूरा नाम मंगते चंगनेजंग मैरी कॉम है । वह विश्व प्रसिद्ध भारतीय बॉक्सर है । उन्होंने पांच बार विश्व मुक्केबाजी चैंपियन जीती है । वह एकमात्र महिला मुक्केबाज है जिन्होंने छह विश्व चैंपियनशिप में से हर एक में एक पदक जीता है । वह एकमात्र भारतीय महिला मुक्केबाज है जिन्होंने २०१२ के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया और फ्लायवेट (51 किलो) वर्ग में कांस्य पदक जीता । उन्हें एआईबीए विश्व महिला रैंकिंग फ्लायवेट वर्ग में नंबर 4 स्थान दिया गया है ।

प्रारंभिक जीवन:

प्रारंभिक जीवन १,९९८ के एशियाई खेलों में मणिपुरी बॉक्सर डिंग्को सिंह के स्वर्ण पदक से प्रेरित होकर, मैरीकॉम एथलेटिक्स में प्रशिक्षित होने के लिए, इम्फाल, मणिपुर की राजधानी गईं । फटे , जर्जर कपड़े पहने , मैरी कोम भारतीय खेल प्राधिकरण के कोच के . कोसाना मीताई के पास गईं और एक मौका दिए जाने के लिए कहा । कोच को याद है कि कैसे मैरी सबके सोने के बाद देर रात अभ्यास करती थीं । चंगनेजंग का लक्ष्य आसान था : गरीबी से अपने परिवार को बाहर निकालना और अपने नाम पर खरा उतरना । मैरी कोम मणिपुर के कांगाथेय गांव के एक गरीब आदिवासी परिवार में पैदा हुई । उसकी दादी उसे चंगनेजंग बुलाती थी , जिसका अर्थ है " समृद्ध " । स्कूल जाने के साथ साथ , अपने छोटे भाई बहन की देखभाल और सभी प्रकार के खेल जैसे हॉकी , फुटबॉल और एथलेटिक्स ( लेकिन मुक्केबाजी नहीं ) में भाग लेने के अलावा , मैरी कोम खेतों में माता-पिता की मदद भी करती थीं ।

मुक्केबाजी की शुरूआत:

मुक्केबाजी की शुरूआत मैरीकॉम ने दृढ़ संकल्प और दृढ़ इच्छा के साथ रिंग में प्रवेश करने का फैसला किया । एक विश्व स्तर के बाक्सर बनने का उसका सपना पूरा करने के लिए, वह भारत खेल प्राधिकरण में शामिल हो गईं और कोच और संरक्षक श्री नरजीत सिंह से गहन प्रशिक्षण लिया । उन्होंने सन २००० में मुक्केबाजी शुरू की । "सिर्फ दो हफ्तों में उन्होंने मुक्केबाजी की सभी मूल बातें सीख ली। मुक्केबाजी का हुनर उन्हें भगवान से प्राप्त हुआ था। उन्होंने मुक्केबाजी में अपनी रुचि को परिवार से छिपाने की कोशिश की , क्योंकि उनका परिवार मुक्केबाजी को एक खेल के रूप में नहीं मानता था। जब उनके राज्य मुक्केबाजी चैम्पियनशिप जीतने की एक फोटो अखबार में आई तब उसके पिता ने उसे डांटा , पर वे आगे बढ़ती गईं।

उपलब्धियाँ:

उपलब्धियाँ 2001 महिला एमेच्योर मुक्केबाजी चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने के बाद, वह लगातार पांच बार स्वर्ण पदक जीत कर , विश्व खिताब जीतने वाली पहली महिला मुक्केबाज बन गई । उन्हें तीन एशियाई खिताब और ग्यारह राष्ट्रीय खिताब के साथ, पद्म श्री पुरस्कार (2006), राजीव गांधी खेल रत्न (2009) और इंटरनेशनल एमेच्योर बॉक्सिंग एसोसिएशन (एआईबीए) से एक विशेष पुरस्कार प्राप्त हुआ है.   अट्ठारह साल की उम्र में, बॉक्सिंग जानने के सिर्फ एक साल के बाद , पेंसिल्वेनिया,अमेरिका में आयोजित , विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में अपनी पहली शुरुआत की ।अपनी पहली ही चैम्पियनशिप में,46 किलो वजन वर्ग में उन्होंने एक रजत पदक जीता । एक साल बाद, एआईबीए विश्व महिला सीनियर मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता ।

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मैरी कॉम की सबसे बडी उपलब्धि यह है कि उन्होंने मुक्केबाजी , जो आमतौर पर पुरुषों का खेल माना जाता है , वहाँ पदक हासिल करके और महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गईं । मैरी कॉम की सफलता के कारण इमफाल में एक मुक्केबाजी अकादमी खोली गयी , वहाँ के हुनर को आगे बढाने के लिए। उनकी सफलता को देखकर ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट ( ओजीक्यू ) अब नए प्रतिभावान और जरूरतमंद लोगों की मदद करता है। उनकी सफलता को देखकर उनके जीवन पर एक चलचित्र का निर्माण भी हो रहा है ताकि अधिक से अधिक लोग प्रेरणा पा सकें। योगदान

मैरी कॉम के शब्दों में ::

मैरी कॉम के शब्दों में : "एक सफल बॉक्सर होने के लिए एक मजबूत दिल होना चाहिए । कुछ महिलाएं शारीरिक रूप से मजबूत होती हैं पर दिल से कमजोर । जीतने के लिए उत्साह और सही लड़ने की भावना होना आवश्यक हैं । मैरी कॉम कहती हैं "हम पुरुषों की तुलना में अधिक काम करती हैं । अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से हम देश का नाम रौशन कर सकती हैं। भगवान ने मुझे प्रतिभा दी अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से ही मैं आज इस मुकाम तक पहुँच पाई हूं।

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http://www.readersdigest.co.in/mary-kom http://www.wban.org/biog/marykom.htm http://en.wikipedia.org/wiki/Mary_Kom http://www.dnaindia.com/sport/report-magnificent-mary-contemplates-social-work-1869667 ग्रंथ सूची तारिणी गुप्ता एस 4 ऐ च

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