logging in or signing up abhay (hindi project of ix-a) abhaychellani Download Post to : URL : Related Presentations : Share Add to Flag Embed Email Send to Blogs and Networks Add to Channel Uploaded from authorPOINT lite Insert YouTube videos in PowerPont slides with aS Desktop Copy embed code: (To copy code, click on the text box) Embed: URL: Thumbnail: WordPress Embed Customize Embed The presentation is successfully added In Your Favorites. Views: 205 Category: Entertainment License: All Rights Reserved Like it (0) Dislike it (0) Added: July 29, 2011 This Presentation is Public Favorites: 1 Presentation Description No description available. Comments Posting comment... Premium member Presentation Transcript Slide 1: मुहावरेSlide 2: चित्र मोटे तौर पर हम कह सकते हैं कि जिस सुगठित शब्द-समूह से लक्षणाजन्य और कभी-कभी व्यंजनाजन्य कुछ विशिष्ट अर्थ निकलता है उसे मुहावरा कहते हैं। कई बार यह व्यंग्यात्मक भी होते हैं। मुहावरे भाषा को सुदृढ़, गतिशील और रुचिकर बनाते हैं। उनके प्रयोग से भाषा में चित्रमयता आती है। मुहावरों के बिना भाषा निस्तेज, नीरस और निष्प्राण हो जाती है। 'मुहावरा' शब्द का अर्थ ही अरबी भाषा में बातचीत करना या उत्तर देना है । बहुत अधिक प्रचलित और लोगों के मुँहचढ़े वाक्य लोकोक्ति के तौर पर जाने जाते हैं। इन वाक्यों में जनता के अनुभव का निचोड़ या सार होता है।Slide 3: परिचय एवं परिभाषा मुहावरा अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है बातचीत करना या उत्तर देना। कुछ लोग मुहावरे को ‘रोज़मर्रा’, ‘बोलचाल’, ‘तर्ज़ेकलाम’, या ‘इस्तलाह’ कहते हैं, किन्तु इनमें से कोई भी शब्द ‘मुहावरे’ का पूर्ण पर्यावाची नहीं बन सका। संस्कृत वाङ्मय में मुहावरा का समानार्थक कोई शब्द नहीं पाया जाता। कुछ लोग इसके लिए ‘प्रयुक्तता’, ‘वाग्रीति’, ‘वाग्धारा’ अथवा ‘भाषा-सम्प्रदाय’ का प्रयोग करते हैं। वी.एस. आप्टे ने अपने ‘इंगलिश-संस्कृत कोश’ में मुहावरे के पर्यावाची शब्दों में ‘वाक्-पद्धति, ‘वाकरीति’, ‘वाक्-व्यवहार’ और ‘विशिष्ट स्वरूप को लिखा है। पराड़कर जी ने ‘वाक्-सम्प्रदाय’ को मुहावरे का पर्यायवाची माना है। काका साहेब कालेलकर ने ‘वाक्-प्रचार’ को ‘मुहावरे’ के लिए ‘रूढ़ि’ शब्द का सुझाव दिया है। यूनानी भाषा में ‘मुहावरे’ को ‘ईडियोमा’, फ्रेंच में ‘इडियाटिस्मी’ और अंग्रेजी में ‘इडिअम’ कहते हैं।Slide 4: शब्दों की तीन शक्तियाँ शब्दों की तीन शक्तियाँ होती हैं : अभिधा, लक्षणा, व्यंजना अभिधा : जब किसी शब्द का सामान्य अर्थ में प्रयोग होता है तब वहाँ उसकी अभिधा शक्ति होती है, जैसे 'सिर पर चढ़ाना' का अर्थ किसी चीज को किसी स्थान से उठाकर सिर पर रखना होगा। लक्षणा : जब शब्द का सामान्य अर्थ में प्रयोग न करते हुए किसी विशेष प्रयोजन के लिए इस्तेमाल किया जाता है, यह जिस शक्ति के द्वारा होता है उसे लक्षणा कहते हैं। लक्षणा से 'सिर पर चढ़ने' का अर्थ आदर देना होगा। उदाहरण के लिए 'अँगारों पर लोटना', 'आँख मारना', 'आँखों में रात काटना', 'आग से खेलना', 'खून चूसना', 'ठहाका लगाना', 'शेर बनना' आदि में लक्षणा शक्ति का प्रयोग हुआ है, इसीलिए वे मुहावरे हैं। व्यंजना : जब अभिधा और लक्षणा अपना काम खत्मकर लेती हैं, तब जिस शक्ति से शब्द-समूहों या वाक्यों के किसी अर्थ की सूचना मिलती है उसे 'व्यंजना' कहते हैं। व्यंजना से निकले अधिकांश अर्थों को व्यंग्यार्थ कहते हैं। 'सिर पर चढ़ाना' मुहावरे का व्यंग्यार्थ न तो 'सिर' पर निर्भर करता है न 'चढ़ाने' पर वरन् पूरे मुहावरे का अर्थ होता है उच्छृंखल, अनुशासनहीन अथवा ढीठ बनाना।Slide 5: मुहावरों में शब्दों की अपरिवर्तनीयता अनेक मुहावरे किसी-न-किसी के अनुभव पर आधारित होते हैं। अतएव यदि उनमें किसी प्रकार का परिवर्तन या उलटफेर किया जाता है तो उनका अनुभव-तत्व नष्ट हो जाता है। उदाहरणार्थ, ‘पानी जाना’ एक मुहावरा है, इसके बदले में हम ‘जल-जल होना’ नहीं कह सकते। ऐसे ही 'गधे को बाप बनाना' की जगह पर 'बैल को बाप बनाना' और'मटरगश्ती करना' की जगह पर 'गेहूँगश्ती' या चनागश्ती' नहीं कहा जा सकता है।Slide 6: अन्य भाषाओं के लिए मुहावरे (क) संस्कृत से-अर्धचन्द्रकार लेकर निकालना : अर्द्धचन्द्र दत्वा निस्सारिता (पंचतंत्र’। कटे पर नमक छिड़कना : क्षते क्षारमिवासह्यम्। (भवभूति) (ख) फारसी और उर्दू से—एक जान दो काबिल, काफुर हो जाना, कारूं का खजाना, कैफियत तलब करन, शीरो-शकर होना।Slide 7: हिन्दी के मुहावरे अंग-अंग ढीले होना – थका होना शाम को घर पहुंचते पहुंचते अंग -अंग ढीले हो चुके होते हैं. अगं-अंग मुस्काना – रोम रोम से प्रसन्नता छलकना लक्ष्य प्राप्ति पर उसके अंग – अंग मुस्काने लगे. अंग टूटना – बदन में दर्द होना. बुखार होने से उसके अंग टूटने लगे थे. अंग धरना – पहनना/धारण करना. ऋत के अनुसार वस्त्र अंग धरने चाहिए. अंग से अंग चुराना – संकुचित होना आज कल बाज़ारों में इतनी भीड़ होती है की चलते समय अंग से अंग चुराने पड़ते है. अंग लगना – हजम हो जाना/काम में आना रोज रोज के पकवान उसके अंग लग गये हैं. अंग लगाना – लिपटना दिनों बाद मिले मित्र को उसने अंग लगा लिया .Slide 8: कुछ और हिन्दी के मुहावरे अंगारे उगलना – जली-कटी कहना/दुर्वचन कहना. खिड़की का काँच टूटा तो सुनिता बच्चों पर अंगारे उगलने लगी. अंगारे बरसना - तेज धूप पड़ना जयेष्ठ माह में अंगारे बरसते हैं. अंगार सिर पर रखना – कष्ट सहना कर्महीन व्यक्ति के सिर पर अंगार रहते है. अंगारों पर लोटना – ईष्या से जलना सौतन को सामने देख वह अंगारों पर लोटने लगी. अंगुठा चुसना – खुशामद करना / धीन होना स्वाभिमानी कभी किसीका अंगुठा नहीं चुसते.Slide 9: कुछ और हिन्दी के मुहावरे मुँह की खाना - बुरी तरह हारना तीनों युद्धों में पाकिस्ताहन को मुँह की खानी पड़ी। मुँह धो रखना/आना - आशा न रखना मुँह धो रखो मैं तुम्हें एक कौड़ी भी नहीं दूँगा। मुँह पकड़ना - बोलने न देना मैंने कोई तुम्हागरा मुँह पकड़ लिया था। मुँह पर बसंत फूलना या खिलना - भयभीत होना जब रात में ज़रा–सी आहट होती है, तो चोरी की आशंका से उसके मुँह पर बसंत फूलना नज़़र आता है।Slide 10: कुछ और हिन्दी के मुहावरे मुँह बनाना - खीझ प्रकट करना उसे कुछ कहते ही वह मुँह बना लेता है। मुँह में पानी भर आना/लार टपकाना - खाने को जी करना जलेबियॉं देखकर मेरे भी मुँह में पानी भर आया। मुट्ठी गकरना करना - धूस देना बाबू या अधिकारी की मुट्ठी गर्म किए बिना यह काम नहीं हो सकता है। मैदान मारना - लड़ाई जीतना पानीपत की लड़ाई में पठानों ने मैदान मार लिया था। मुट्ठी में करना - वश में करना सास ने बहू को मुट्ठी में कर रखा है।Slide 11: var You do not have the permission to view this presentation. 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Premium member Presentation Transcript Slide 1: मुहावरेSlide 2: चित्र मोटे तौर पर हम कह सकते हैं कि जिस सुगठित शब्द-समूह से लक्षणाजन्य और कभी-कभी व्यंजनाजन्य कुछ विशिष्ट अर्थ निकलता है उसे मुहावरा कहते हैं। कई बार यह व्यंग्यात्मक भी होते हैं। मुहावरे भाषा को सुदृढ़, गतिशील और रुचिकर बनाते हैं। उनके प्रयोग से भाषा में चित्रमयता आती है। मुहावरों के बिना भाषा निस्तेज, नीरस और निष्प्राण हो जाती है। 'मुहावरा' शब्द का अर्थ ही अरबी भाषा में बातचीत करना या उत्तर देना है । बहुत अधिक प्रचलित और लोगों के मुँहचढ़े वाक्य लोकोक्ति के तौर पर जाने जाते हैं। इन वाक्यों में जनता के अनुभव का निचोड़ या सार होता है।Slide 3: परिचय एवं परिभाषा मुहावरा अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है बातचीत करना या उत्तर देना। कुछ लोग मुहावरे को ‘रोज़मर्रा’, ‘बोलचाल’, ‘तर्ज़ेकलाम’, या ‘इस्तलाह’ कहते हैं, किन्तु इनमें से कोई भी शब्द ‘मुहावरे’ का पूर्ण पर्यावाची नहीं बन सका। संस्कृत वाङ्मय में मुहावरा का समानार्थक कोई शब्द नहीं पाया जाता। कुछ लोग इसके लिए ‘प्रयुक्तता’, ‘वाग्रीति’, ‘वाग्धारा’ अथवा ‘भाषा-सम्प्रदाय’ का प्रयोग करते हैं। वी.एस. आप्टे ने अपने ‘इंगलिश-संस्कृत कोश’ में मुहावरे के पर्यावाची शब्दों में ‘वाक्-पद्धति, ‘वाकरीति’, ‘वाक्-व्यवहार’ और ‘विशिष्ट स्वरूप को लिखा है। पराड़कर जी ने ‘वाक्-सम्प्रदाय’ को मुहावरे का पर्यायवाची माना है। काका साहेब कालेलकर ने ‘वाक्-प्रचार’ को ‘मुहावरे’ के लिए ‘रूढ़ि’ शब्द का सुझाव दिया है। यूनानी भाषा में ‘मुहावरे’ को ‘ईडियोमा’, फ्रेंच में ‘इडियाटिस्मी’ और अंग्रेजी में ‘इडिअम’ कहते हैं।Slide 4: शब्दों की तीन शक्तियाँ शब्दों की तीन शक्तियाँ होती हैं : अभिधा, लक्षणा, व्यंजना अभिधा : जब किसी शब्द का सामान्य अर्थ में प्रयोग होता है तब वहाँ उसकी अभिधा शक्ति होती है, जैसे 'सिर पर चढ़ाना' का अर्थ किसी चीज को किसी स्थान से उठाकर सिर पर रखना होगा। लक्षणा : जब शब्द का सामान्य अर्थ में प्रयोग न करते हुए किसी विशेष प्रयोजन के लिए इस्तेमाल किया जाता है, यह जिस शक्ति के द्वारा होता है उसे लक्षणा कहते हैं। लक्षणा से 'सिर पर चढ़ने' का अर्थ आदर देना होगा। उदाहरण के लिए 'अँगारों पर लोटना', 'आँख मारना', 'आँखों में रात काटना', 'आग से खेलना', 'खून चूसना', 'ठहाका लगाना', 'शेर बनना' आदि में लक्षणा शक्ति का प्रयोग हुआ है, इसीलिए वे मुहावरे हैं। व्यंजना : जब अभिधा और लक्षणा अपना काम खत्मकर लेती हैं, तब जिस शक्ति से शब्द-समूहों या वाक्यों के किसी अर्थ की सूचना मिलती है उसे 'व्यंजना' कहते हैं। व्यंजना से निकले अधिकांश अर्थों को व्यंग्यार्थ कहते हैं। 'सिर पर चढ़ाना' मुहावरे का व्यंग्यार्थ न तो 'सिर' पर निर्भर करता है न 'चढ़ाने' पर वरन् पूरे मुहावरे का अर्थ होता है उच्छृंखल, अनुशासनहीन अथवा ढीठ बनाना।Slide 5: मुहावरों में शब्दों की अपरिवर्तनीयता अनेक मुहावरे किसी-न-किसी के अनुभव पर आधारित होते हैं। अतएव यदि उनमें किसी प्रकार का परिवर्तन या उलटफेर किया जाता है तो उनका अनुभव-तत्व नष्ट हो जाता है। उदाहरणार्थ, ‘पानी जाना’ एक मुहावरा है, इसके बदले में हम ‘जल-जल होना’ नहीं कह सकते। ऐसे ही 'गधे को बाप बनाना' की जगह पर 'बैल को बाप बनाना' और'मटरगश्ती करना' की जगह पर 'गेहूँगश्ती' या चनागश्ती' नहीं कहा जा सकता है।Slide 6: अन्य भाषाओं के लिए मुहावरे (क) संस्कृत से-अर्धचन्द्रकार लेकर निकालना : अर्द्धचन्द्र दत्वा निस्सारिता (पंचतंत्र’। कटे पर नमक छिड़कना : क्षते क्षारमिवासह्यम्। (भवभूति) (ख) फारसी और उर्दू से—एक जान दो काबिल, काफुर हो जाना, कारूं का खजाना, कैफियत तलब करन, शीरो-शकर होना।Slide 7: हिन्दी के मुहावरे अंग-अंग ढीले होना – थका होना शाम को घर पहुंचते पहुंचते अंग -अंग ढीले हो चुके होते हैं. अगं-अंग मुस्काना – रोम रोम से प्रसन्नता छलकना लक्ष्य प्राप्ति पर उसके अंग – अंग मुस्काने लगे. अंग टूटना – बदन में दर्द होना. बुखार होने से उसके अंग टूटने लगे थे. अंग धरना – पहनना/धारण करना. ऋत के अनुसार वस्त्र अंग धरने चाहिए. अंग से अंग चुराना – संकुचित होना आज कल बाज़ारों में इतनी भीड़ होती है की चलते समय अंग से अंग चुराने पड़ते है. अंग लगना – हजम हो जाना/काम में आना रोज रोज के पकवान उसके अंग लग गये हैं. अंग लगाना – लिपटना दिनों बाद मिले मित्र को उसने अंग लगा लिया .Slide 8: कुछ और हिन्दी के मुहावरे अंगारे उगलना – जली-कटी कहना/दुर्वचन कहना. खिड़की का काँच टूटा तो सुनिता बच्चों पर अंगारे उगलने लगी. अंगारे बरसना - तेज धूप पड़ना जयेष्ठ माह में अंगारे बरसते हैं. अंगार सिर पर रखना – कष्ट सहना कर्महीन व्यक्ति के सिर पर अंगार रहते है. अंगारों पर लोटना – ईष्या से जलना सौतन को सामने देख वह अंगारों पर लोटने लगी. अंगुठा चुसना – खुशामद करना / धीन होना स्वाभिमानी कभी किसीका अंगुठा नहीं चुसते.Slide 9: कुछ और हिन्दी के मुहावरे मुँह की खाना - बुरी तरह हारना तीनों युद्धों में पाकिस्ताहन को मुँह की खानी पड़ी। मुँह धो रखना/आना - आशा न रखना मुँह धो रखो मैं तुम्हें एक कौड़ी भी नहीं दूँगा। मुँह पकड़ना - बोलने न देना मैंने कोई तुम्हागरा मुँह पकड़ लिया था। मुँह पर बसंत फूलना या खिलना - भयभीत होना जब रात में ज़रा–सी आहट होती है, तो चोरी की आशंका से उसके मुँह पर बसंत फूलना नज़़र आता है।Slide 10: कुछ और हिन्दी के मुहावरे मुँह बनाना - खीझ प्रकट करना उसे कुछ कहते ही वह मुँह बना लेता है। मुँह में पानी भर आना/लार टपकाना - खाने को जी करना जलेबियॉं देखकर मेरे भी मुँह में पानी भर आया। मुट्ठी गकरना करना - धूस देना बाबू या अधिकारी की मुट्ठी गर्म किए बिना यह काम नहीं हो सकता है। मैदान मारना - लड़ाई जीतना पानीपत की लड़ाई में पठानों ने मैदान मार लिया था। मुट्ठी में करना - वश में करना सास ने बहू को मुट्ठी में कर रखा है।Slide 11: var