life cycle through story

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Presentation Description

here please assume tinka as human soul which is in a body. this is a story of human soul which is not able to come outside from materialistic mud without his SATGURU's help. Please read questions and answers carefully and assume yourself as tinka...

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Presentation Transcript

Slide 1:

एक नदी बह रही है | एक तिनका A पानी में आ गिरा और तैरने लगा | कुछ और आगे चल के उनमे से कुछ तिनके उससे अलग हो गये | तिनके का रंग फिर बदल गया । A A A A कुछ और आगे चल के वो तिनका फिर और तिनको से मिला | अबकी बार कुछ कंकड़ पत्थर भी उसके साथ जुड़ गये |तिनके का रंग फिर बदल गया । कुछ और आगे चल के वो तिनका और भी तिनको से मिला | और तिनके का रंग अपने आस पास के वातावरण के अनुसार बदल गया ।

Slide 2:

A रास्ते में एक बड़ा पत्थर आ गया | अब फिर जब कोई तेज बहाव आएगा तो उसे बहा कर आगे ले जाएगा | A फिर से एक बड़ा पत्थर आ गया | वह तिनका A उन कंकड़ पत्थरों के उसके साथ होने की वजह से फिर से अटक गया | तिनके का रंग फिर बदल गया । अब जब कोई तेज बहाव आएगा तो उसे बहा कर आगे ले जाएगा | वह तिनका A उन कंकड़ पत्थरों के उसके साथ होने की वजह से से अटक गया | तिनके का रंग फिर बदल गया ।

Slide 3:

A A A वह तिनका कंकड़ पत्थर की वजह से इतना भारी हो गया की गड्ढे की ओर जाने लगा | तिनके का रंग फिर बदल गया । अब अपने बाकि बंधनों से तो तिनका बहार निकल गया | पर अब तक तो बहुत देर हो चुकी थी और वह गड्ढे में गिरने ही वाला है A A A तिनका उस गड्ढे में गिर गया जिसमे पहले से ही और भी गंदगी थी और जो वापस जाकर इसी नदी में मिलता है जिसमें वो तिनका गिर गया था और न ही वो वापस अपने मूल रंग में आ पाया | किनारा गड्ढा

Slide 4:

अब अगर

Slide 5:

एक नदी बह रही है | एक तिनका पानी में आ गिरा और तैरने लगा | कुछ और आगे चल के उनमे से कुछ तिनके उससे अलग हो गये | तिनके का रंग फिर बदल गया । A A A A एक नाव जा रही है | A को अब नाव का सहारा मिल गया | बाकी सब वैसे का वैसा है | A आगे चलके बहुत से तिनके व् कंकड़ पत्थर मिले पर ये क्या A का रंग नहीं बदला | कुछ और आगे चल के वो तिनका और भी तिनको से मिला || और तिनके का रंग अपने आस पास के वातावरण के अनुसार बदल गया ।

Slide 6:

फिर से एक बड़ा पत्थर आ गया | रास्ते में एक बड़ा पत्थर आ गया | पहले की तरह अब भी बड़े पत्थर राह में आये पर ये क्या ? A का रंग नहीं बदला ? A उन पत्थरों पर अटका भी नहीं ? A का वह घेरा भी ढीला पड़ गया जिसमे वह अन्य कंकड़ पत्थरों और तिनको के साथ बंधा था ? नाव के सहारे की वजह से तिनका A न सिर्फ उन पत्थरों को आसानी पार करने में सक्षम हो सका बल्कि बाकि के तिनको और कंकड़ पत्थरों से खुद को अलग भी कर पाया | A Next

Slide 7:

किनारा A A अब तिनका अपने मूल रंग में आ चूका है | नाव के सहारे तिनका किनारे तक पहुँच गया है अर्थात अपनी उसी जगह जहाँ से वो नदी में गिरा था | गड्ढा Next

Slide 8:

समय आइये अब इस कहानी को एक दुसरे नजरिये से देखते है | 1) नदी क्या है ? जो कि बहता ही जा रहा है, किसी के लिए नहीं रुकता | परमपिता ने हमे साँसों के रूप में समय दिया है | जब साँसे पूरी होंगी तो समय रूपी नदी के साथ किसी न किसी समंदर में गिरना ही होगा | समय बहुत महत्वपूर्ण है |

Slide 9:

आत्मा (हम) 2) तिनका क्या है ? विकार काम, क्रोध, लोभ, मोह, इर्ष्या, अहंकार 3) कंकड़ – पत्थर क्या है ?

Slide 10:

भाव कभी ख़ुशी के, कभी गम के 4) तिनके का बदलता रंग क्या है ? इस दुनिया की कोई बड़ी सफलता या इस दुनिया का कोई बड़ा दुःख 5) बड़ा पत्थर क्या है ?

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बदलाव 6) तेज बहाव क्या है ? किसी भी तरह का | जैसे दुःख के में अटका तो सुख का बदलाव और सुख में अटका तो दुःख का बदलाव | बदलाव तो संसार का नियम है |

Slide 12:

श्री सतगुरु महाराज 7) नाव क्या है ? जैसे नदी पार करने के लिए यदि तिनका नाव का सहारा लेता है तो कंकड़ पत्थर और अन्य तिनको के साथ होने पर भी अपनी यात्रा को आसानी से पूरा करता है और किनारे तक पहुँच जाता है | ठीक उसी प्रकार यदि हमें भी हमारे ईष्ट की कृपा से श्री सतगुरु महाराज की कृपा प्राप्त होती तो हम भी इस समय रूपी नदी को पार कर अंत में प्रभु मिलन वाले समंदर में गिरने में सफल हो सकेंगे | और इस प्रकार मानव शरीर का सही मायने में फायदा उठा पायेंगे |

Slide 13:

ईष्ट 8) किनारा क्या है ? हमारा स्रोत, जहाँ से हम आये है | जैसा तिनका किनारे से नदी में आ गिरा था और जब वापस किनारे पर पहुँच गया तो उसकी यात्रा पूरी हो गयी | उसी प्रकार हम भी परमपिता परमात्मा से निकल कर एक मुसाफिर की तरह इस दुनिया में आये है और जब हम वापस अपने स्रोत यानी परमपिता में मिल जायेंगे तो हमारी यात्रा पूरी हो जायेगी |

Slide 14:

9) तिनके के साथ इस पूरी यात्रा में कौन था ? वो अदृश्य शक्ति जो तिनके को पानी में तैरने की शक्ति दे रही थी | अर्थात् प्रकृति का नियम कि हल्की चीज पानी के ऊपर तैरती है | साँसों के रूप में | इसी प्रकार हमारी यात्रा में भी जन्म से लेकर अब तक वो ही अदृश्य शक्ति जो की परमपिता परमात्मा है, हमारे साथ हैं | जैसे यदि प्रकृति अपना नियम तोड़ दे तो तिनका डूब जाएगा | उसी प्रकार यदि वो परमपिता परमात्मा शिव हमारे शरीर से निकल जाएँ तो यह शरीर मात्र शव रह जाएगा |

Slide 15:

जिस दिन माँ के पेट में मुझे यह शरीर मिला उस दिन से अब तक मेरे साथ मेरे ईष्ट ही है जो मेरे भीतर बैठे मेरी साँसे चला रहे है | हम सभी तिनको की तरह बहती नदी में बहे जा रहे है | पानी के बहाव के अनुसार अन्य तिनको से मिलते और बिछुडते रहते है | यदि हम तिनके(अपने) को अन्यों के साथ रहते हुए अर्थात संसार में रहते हुए किनारे(ईष्ट) तक पहुँचाना चाहते है तो हमे अपने को कंकड़ – पत्थरों (विकारों), बड़े पत्थरों(सांसारिक ख़ुशी या दुःख), तेज बहाव(अत्यंत सांसारिक दुःख या ख़ुशी) और अपने बदलते रंग(ख़ुशी और दुःख का भाव) से बचाना होगा | सारांश और यह केवल और केवल तभी संभव है जब हम श्री सतगुरु रूपी नाव का सहारा लेंगे |

Slide 16:

इसलिए साँसों को चलाने वाले ईष्ट ही हमारे सबसे नजदीक है | जय गुरुदेव श्री सतगुरु महाराज की कृपा से ही हम अपने ईष्ट से मिल सकते है | भावार्थ सतगुरु महाराज की कृपा पाने के लिए जरूरी है - १) उनके श्री चरणों में बैठ कर उनके वचन सुनना अर्थात सतत नाम सुमिरन | २) आत्म चिंतन

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